
नशे पर कार्रवाई में असंतुलन, क्या जागेगा आबकारी विभाग?
रायगढ़ जिला में इन दिनों नशे के खिलाफ अभियान तेज होता दिखाई दे रहा है। जिला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस लगातार नशा कारोबारियों पर शिकंजा कस रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन का एक हिस्सा इस गंभीर सामाजिक समस्या को लेकर सक्रिय है। आए दिन हो रही कार्रवाई से नशे के नेटवर्क पर कुछ हद तक अंकुश भी लगा है।
लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब पुलिस अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है, तो आबकारी विभाग की भूमिका इतनी निष्क्रिय क्यों नजर आ रही है? जिस विभाग पर अवैध शराब और मादक पदार्थों के नियंत्रण की प्राथमिक जिम्मेदारी है, वही विभाग यदि उदासीन बना रहे, तो पूरी मुहिम अधूरी रह जाती है।
नशा आज केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और पीढ़ीगत संकट बन चुका है। खासकर युवा वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। यदि समय रहते ठोस और समन्वित कार्रवाई नहीं हुई, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम समाज को भुगतने पड़ेंगे।
यह जरूरी है कि आबकारी विभाग भी पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सख्त कार्रवाई करे। केवल औपचारिकता निभाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अवैध शराब गांजा नशीली गोलियां सिरफ़ एवं अन्य नशीली वस्तुओं की बिक्री, तस्करी और नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर और प्रभावी अभियान चलाना होगा।
प्रशासन के सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय ही इस लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। यदि आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए, तो निश्चित ही रायगढ़ में नशे के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सकता है और नई पीढ़ी को इस दलदल में जाने से बचाया जा सकता है।
अब वक्त है कि जिम्मेदार विभाग जागें और नशे के खिलाफ इस जंग को एक व्यापक और निर्णायक अभियान में बदलें। तभी समाज सुरक्षित और युवा भविष्य मजबूत हो सकेगा।