
रायगढ़ में एक और कोयला खदान की तैयारी: तमनार में 19 मई को जनसुनवाई, हजारों परिवारों पर संकट के बादल
रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड में एक बार फिर कोयला खदान परियोजना को लेकर हलचल तेज हो गई है। Coal India Limited की प्रस्तावित नई खदान, जिसका संचालन एमडीओ (Mine Developer and Operator) मॉडल के तहत Adani Group से जुड़ा बताया जा रहा है, उसकी जनसुनवाई 19 मई 2026 को अटल चौक, पेलमा में आयोजित की जाएगी।
यह प्रस्तावित कोयला खदान लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली होगी, जिसमें से करीब 361 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होने का अनुमान है। परियोजना के दायरे में आने वाले 14 गांवों के लगभग 1350 परिवारों के विस्थापन और आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
🌿 पर्यावरण पर गहराता संकट
रायगढ़ पहले से ही औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रहा है। कोयला खदानों, पावर प्लांट्स और भारी उद्योगों के कारण यहां की हवा, पानी और मिट्टी लगातार प्रदूषित हो रही है। ऐसे में एक और खदान परियोजना का प्रस्ताव पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।
इस परियोजना के तहत लाखों पेड़ों की कटाई संभावित है, जिससे जैव विविधता, वन्यजीव और प्राकृतिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। जल स्रोतों के सूखने और भूजल स्तर गिरने का खतरा भी बढ़ सकता है।
🏠 विस्थापन और आजीविका का संकट
परियोजना से प्रभावित होने वाले 14 गांवों के लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल घर, जमीन और रोजगार का है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले की परियोजनाओं में भी उन्हें उचित मुआवजा, स्थायी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाईं।
ग्रामीणों का आरोप है कि “विकास” के नाम पर उनकी जल, जंगल और जमीन छीनी जा रही है, जबकि बदले में उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है।
⚖️ विकास बनाम अस्तित्व की लड़ाई
तमनार क्षेत्र में यह मुद्दा अब केवल एक खदान परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विकास बनाम अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना से पहले पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गहन मूल्यांकन जरूरी है, साथ ही प्रभावित लोगों की सहमति और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था भी अनिवार्य होनी चाहिए।
🗣️ जनसुनवाई पर टिकी निगाहें
19 मई को अटल चौक, पेलमा में होने वाली जनसुनवाई को लेकर प्रशासन, कंपनी और स्थानीय ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। यह जनसुनवाई तय करेगी कि यह परियोजना आगे बढ़ेगी या स्थानीय विरोध के चलते इसमें बदलाव संभव होगा।
❗ बड़ा सवाल
क्या विकास के नाम पर पर्यावरण और लोगों के जीवन से समझौता किया जा सकता है?
क्या सरकार और कंपनियां इस बार प्रभावित परिवारों को न्याय दिला पाएंगी या फिर एक बार फिर वही कहानी दोहराई जाएगी?
रायगढ़ की जनता और तमनार के ग्रामीण अब इन सवालों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।