छत्तीसगढ़तमनार

आखिर जन सुनवाई के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों **********

तमनार क्षेत्र में एक बार फिर प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र का माहौल गरमाने लगा है। अभी लोग पिछली जनसुनवाई के दौरान हुई हिंसात्मक घटनाओं और तनावपूर्ण माहौल को भूल भी नहीं पाए हैं कि अब पेलमा कोल माइंस एसईसीएल की नई जनसुनवाई 19 मई को आयोजित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या प्रशासन तमनार क्षेत्र की पीड़ा और भय को नजरअंदाज कर आगे बढ़ना चाहता है, या फिर किसी दबाव में जनसुनवाई सम्पन्न कराने की कोशिश की जा रही है?
तमनार क्षेत्र पहले से ही उद्योगों, खदानों और प्रदूषण की मार झेल रहा है। बीते दिनों जिंदल परियोजना की जनसुनवाई के दौरान जो हालात बने थे, उसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। विरोध प्रदर्शन, पुलिस बल की मौजूदगी, तनाव और हिंसात्मक झड़पों की तस्वीरें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। कई ग्रामीणों का आरोप था कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई और जनसुनवाई औपचारिकता बनकर रह गई। ऐसे माहौल में अब फिर एक नई जनसुनवाई की घोषणा ने लोगों के भीतर आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक पिछली घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा नहीं होती और क्षेत्रवासियों के विश्वास को बहाल नहीं किया जाता, तब तक नई जनसुनवाई आयोजित करना उचित नहीं माना जा सकता। लोगों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन जनता की आशंकाओं और विरोध को गंभीरता से नहीं लेता, तो तमनार में फिर से तनावपूर्ण स्थिति बन सकती है।
क्षेत्र के लोगों के मन में कई सवाल हैं — क्या पर्यावरणीय प्रभावों का सही आकलन किया गया है? क्या प्रभावित गांवों की सहमति वास्तव में ली जा रही है? क्या रोजगार और विकास के नाम पर ग्रामीणों के जल, जंगल और जमीन से समझौता किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन और परियोजना प्रबंधन इसे विकास और रोजगार से जोड़कर देख रहे हैं। लेकिन जिस तरह से क्षेत्र में विरोध की चिंगारी सुलग रही है, वह कभी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है। यदि संवाद और विश्वास का रास्ता नहीं अपनाया गया तो तमनार कांड जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस जनसुनवाई को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न कराने के लिए क्या कदम उठाता है, या फिर एक बार फिर तमनार विवाद और टकराव का केंद्र बनने जा रहा है।

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