
रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कटेल टिकरा में 12 मई को मिली अज्ञात युवती की लाश की पहचान अब महिला अधिवक्ता आराधना सीदार के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभिक जानकारी और पुलिस इश्तहार के अनुसार जिस निर्ममता के साथ वारदात को अंजाम दिया गया, उसने लोगों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।
बताया जा रहा है कि युवती का शव नग्न अवस्था में मिला था। उसका गला काटा गया था और पहचान छिपाने के उद्देश्य से चेहरे को भारी पत्थर से कुचल दिया गया था। हत्या की यह क्रूरता कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस अब हर पहलू से मामले की जांच में जुटी हुई है।
जानकारी के अनुसार आराधना सीदार घटना वाले दिन किसी “फंक्शन” में जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटी। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि युवती के लापता होने के बाद भी उसके मोबाइल फोन से परिचितों को लगातार मैसेज भेजे जा रहे थे। इससे आशंका जताई जा रही है कि हत्यारों ने पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल किया। अब जांच एजेंसियां मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों को खंगाल रही हैं, जिन्हें इस पूरे हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।
इधर मामले के खुलासे के बाद वकीलों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने शोक सभा आयोजित कर दिवंगत अधिवक्ता को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की। प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक (SP) से मिलने भी पहुंचा और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
पूंजीपथरा का यह मामला केवल एक जघन्य हत्या नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती असुरक्षा और अपराध की भयावह तस्वीर को भी सामने लाता है। अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस जटिल मामले की परतें कितनी तेजी और पारदर्शिता से खोल पाती हैं। क्योंकि इस बार सवाल सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर लोगों के विश्वास का भी है।