
जामपाली खुली खदान में बेलगाम भारी वाहनों पर लगाम कब?
गोवंश की मौत पर आक्रोश, SECL प्रबंधन को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की चेतावनी
रायगढ़। जामपाली खुली खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की तेज रफ्तार और अनियंत्रित आवाजाही अब गोवंश के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। सड़क पर आने वाले गोवंश के वाहनों की चपेट में आने की घटनाओं के बाद भी यदि SECL प्रबंधन, सब एरिया मैनेजर और संबंधित परिवहन कंपनियां प्रभावी कदम नहीं उठातीं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि साइडिंग से जुड़े भारी वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है और उत्पादन व डिस्पैच को प्राथमिकता देते हुए सड़क सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की गति नियंत्रित करने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता है।
गोवंश की मौत पर बढ़ता आक्रोश
लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने स्थानीय ग्रामीणों और गोवंश संरक्षण से जुड़े लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि गोवंश की जान किसी भी उत्पादन लक्ष्य से बड़ी है। यदि भारी वाहनों की रफ्तार पर तत्काल लगाम नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
SECL प्रबंधन से सीधी मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि—
जामपाली खदान एवं साइडिंग मार्ग पर भारी वाहनों की स्पीड लिमिट सख्ती से लागू की जाए।
संवेदनशील स्थानों पर स्पीड ब्रेकर और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं।
रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
वाहन चालकों की गति और लापरवाही पर नियमित निगरानी रखी जाए।
गोवंश एवं आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था तत्काल लागू की जाए।
“अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए”
राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी (भारत) के *राष्ट्रीय महासचिव केदार नाथ साहू* ने SECL प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया और फिर किसी गोवंश की तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से मौत हुई, तो ग्रामीणों एवं गोवंश संरक्षण से जुड़े लोगों द्वारा लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक विरोध-प्रदर्शन और वैधानिक कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि “गोवंश की जान से बड़ा कोई उत्पादन लक्ष्य नहीं है। साइडिंग की गाड़ियों पर लगाम लगाना जरूरी है। अगली घटना रोकने के लिए प्रबंधन को अभी कार्रवाई करनी होगी।”
हालांकि, किसी भी विरोध या आंदोलन के दौरान हिंसा का रास्ता स्वीकार्य नहीं है। कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखते हुए वैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराना ही उचित होगा।
*अब सवाल सीधा है*—क्या SECL प्रबंधन किसी और हादसे का इंतजार कर रहा है, या समय रहते जामपाली खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की रफ्तार और सुरक्षा व्यवस्था पर ठोस कार्रवाई होगी?