
गुरुजनों के सम्मान से समृद्ध होती परंपरा
तमनार में शिक्षक दिवस पर लगभग 500 शिक्षक एवं पेंशनर कर्मचारियों का सम्मान
तमनार। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य की नींव रखने वाला मार्गदर्शक होता है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा और वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान की भावना को जीवंत रखते हुए शिक्षक दिवस के अवसर पर तमनार के मंगलम भवन में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
विगत वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आयोजित इस समारोह में लगभग 500 सेवानिवृत्त एवं सेवारत शिक्षक तथा पेंशनर कर्मचारियों का तिलक-रोली, माल्यार्पण, श्रीफल, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन और डॉ. राधाकृष्णन को नमन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षकों ने डॉ. राधाकृष्णन के व्यक्तित्व और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को स्मरण करते हुए गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ वर्तमान में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। लंबे समय तक शिक्षा एवं शासकीय सेवा के माध्यम से समाज को योगदान देने वाले वरिष्ठजनों के सम्मान ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
‘गुरुजनों का सम्मान हमारा सौभाग्य’ — सुनीति सत्यानंद राठिया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सुनीति सत्यानंद राठिया ने उपस्थित शिक्षक-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों का चरण वंदन करते हुए शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि सैकड़ों गुरुजनों एवं कर्मचारियों का सम्मान करना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा को अत्यंत पवित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा नहीं देता, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, संस्कार और जीवन की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उनके शिक्षा संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षकों का योगदान किसी भी समाज के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण होता है। वरिष्ठजनों और गुरुजनों के अनुभव एवं मार्गदर्शन से आने वाली पीढ़ियों को दिशा मिलती है।
19 वर्षों से सम्मान की परंपरा
समारोह में यह बात भी प्रमुखता से सामने आई कि वर्ष 2007 से लगातार 19 वर्षों से तमनार में शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुजनों एवं कर्मचारियों के सम्मान की परंपरा चली आ रही है।
किसी भी सामाजिक परंपरा की वास्तविक मजबूती उसकी निरंतरता में होती है। ऐसे आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान, नई पीढ़ी में संस्कार और शिक्षा के महत्व का संदेश भी देते हैं।
तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी भवन का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया गया। कर्मचारी वर्ग के लिए भवन उपलब्ध होना संगठनात्मक गतिविधियों, बैठकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं कर्मचारी हित से जुड़े कार्यक्रमों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
राजनीतिक उपस्थिति के साथ सामाजिक संदेश
कार्यक्रम में भाजपा जिला एवं मंडल पदाधिकारियों, वरिष्ठ एवं शिष्ट कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, मातृशक्ति, युवाशक्ति तथा क्षेत्र के विशिष्ट नागरिकों की उपस्थिति रही।
हालांकि कार्यक्रम में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी रही, लेकिन शिक्षक दिवस जैसे अवसर का मूल संदेश राजनीति से ऊपर गुरु, शिक्षा और वरिष्ठजनों के सम्मान का रहा। किसी भी लोकतांत्रिक समाज में राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के बीच ऐसी सकारात्मक गतिविधियां संवाद और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने का माध्यम बन सकती हैं।
सम्मान केवल श्रीफल और शॉल तक सीमित न रहे



शिक्षक दिवस के ऐसे आयोजन हमें एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर भी विचार करने का अवसर देते हैं—क्या शिक्षक का सम्मान केवल एक दिन श्रीफल, शॉल और स्मृति चिन्ह देने तक सीमित रहना चाहिए?
निश्चित रूप से नहीं।
शिक्षक का वास्तविक सम्मान तब होगा, जब शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, विद्यालयों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों, शिक्षकों को सम्मानजनक कार्य वातावरण मिले और विद्यार्थियों में गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो। इसी तरह सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों का अनुभव समाज के लिए उपयोगी बने, इसके लिए उनके ज्ञान एवं अनुभव को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल भी जरूरी है।
तमनार में लगातार वर्षों से आयोजित हो रहा यह सम्मान समारोह इसी व्यापक सामाजिक सोच की ओर संकेत करता है। गुरुजनों का सम्मान वास्तव में उस ज्ञान, अनुशासन और अनुभव का सम्मान है, जिसके आधार पर समाज की अगली पीढ़ी तैयार होती है।
शिक्षक दिवस का यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें वर्तमान शिक्षकों के साथ उन वरिष्ठ शिक्षकों एवं कर्मचारियों को भी सम्मान मिला, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा समाज और शासन की सेवा में लगाया।
अंततः शिक्षक दिवस का सार यही है कि जिस समाज में गुरु का सम्मान जीवित रहता है, वहां ज्ञान, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की परंपरा भी जीवित रहती है। तमनार का यह आयोजन इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक प्रयास कहा जा सकता है।