रायगढ़

गरीबों के चावल में पड़ रहा डाका आखिर क्या है मामला की नहीँ मिल रहा गरीबो को चावल

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राज्य सरकार गरिबों को मुफ्त में राशन बाटनें का ढिंढोरा पिट रही है,साथ ही केंद्र सरकार भी गरीबों के लिए कोरोना काल के समय से गरिबों को बोनश के रुप में दिसंबर तक चावल दे रही थी ,लेकिन रायगढ़ जिले के लैलूंगा विधानसभा में सरकार की ये योजनाएं ठप्प है, अक्टूबर माह से चालु हुआ महघोटाला थमनें का नाम नही ले रहा, हजरों लोगों को चावल मिलने में झोलझाल की खबर सामनें आई है, दुकान संचालक कभी तकनीकी खराबी बताते है, कभी चावल का स्टाक नहीं आना,लेकिन मुख्य वजह सामनें निकल कर आती है रिकवरी निकलना, अब संचालक लोगों को आश्वासन देते हुए फिंगरप्रिंट भी लगवा लिए हैं क्यों की सरकारी डाटा में तो सबकुछ सही जो दिखाना है लेकिन हजारों परिवार को अपने ही हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ रहा है ।

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*एस डी एम आफिस में मिल चके हैं ग्रामीण*

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हितग्राही अपने राशन के लिए एस डी एम आफिस के भी चक्कर लगा रहे हैं, अक्टूबर माह से प्रारंभ हुई यह समस्या थमने का नाम नही ले रही है , बिते दिनो रोडोपाली पंचायत के ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर घरघोड़ा एस डी एम कार्यालय भी पहुंचे थे लेकिन किसी प्रकार की सुनवाई अब तक नहीं हुई ।

पुर्व मंत्री ने कहा होनी चाहिए जांच

चाउर वाले बाबा के राज मे सब को मिलता था राशन: राठिया

पुर्व मंत्री रहे सत्यानंद राठिया ने भी अब गरिबों के राशन ढठारने वाले संचालकों पर सवाल उठाए है, उनहोंने अब गस मामले को लेकर खाद्यमंत्री को पत्र लिख कर जांच कराने की मांग कह रहे है , साथ ही कांग्रेस की सरकार पर एक बड़ा आरोप लगया है , उन्होंने कहा है की जब हमारी सरकार थी , रमन सिंह की सरकार थी तब हर गरीब को राशन मिलता था, तब ओ चाउर वाले बाबा कहलाते थे लेकिन जब से कांग्रेस की सरकार आई है ये गरीबों की हक डकारने वाली सरकार है, साथ ही कहा की जल्द से जल्द यदी मामले की जांच नही होती है या फिर गरिबों को उनका हक नहीं मिलेगा तो संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी शिकायत कर जांच की मांग करेंगे ।

घोटाला को समझना जरूरी

किसी पंचायत में यदि एक माह में 2 क्विंटल चावल बचता है और उसे संचालक आपस में बाट या बेच देता है साल भर में यह 24 क्विंटल 5 साल में 120 क्विंटल और इसी की रिक्वरी निकलती है , क्योंकि स्टाक तो सोसायटियों में आनलाईन भंडारित दिखाई जा रही है,फिर आनन फानन में कुछ संचालक औने पौने दाम मेन खरीदकर भर देते हैं, कुछ संचालक भोले भाले ग्रामीणों का विश्वास जीत अर उनको बाद में देने का आश्वासन देकर फिंगर लगवा लेते हैं, और राशन देते ही नही है गांव की गरीब जनता अपने मुफ्त के राशन के लिए मोहताज हो जाती है, अधिकतर ग्रामीण शिकायत इस कारण से नहीं करते क्योंकि उनको डर रहता है कि अगले महीने से उनका नाम राशन कार्ड से संचालक काट ना दे।

तकनिकी समस्या के कारण भी होती है समस्या

एक संचालक से बात करने पर उसनें नाम ना लिखने की शर्त पर बताया कि कई बार तकनीकी समस्या के कारण भी लोगो को राशन वितरण नहीं कर पाते है । कई दिनों तक सर्वर में भी,खराबी आ जाती है जिससे वितरण में परेशानी होती है।

अब देखने वाली बात होगी कि अधिकारी किस प्रकार से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कर गरीबों को उनके हक कर राशन दिलाते ।

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