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बैरंग लौटी तहसीलदार की टीम ग्रामीणों की एकजुटता से नाकाम रहे अधिकारी जानिए क्या था मामला

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रायगढ़ जिले के तहसील तमनार के तहसीलदार अनुज पटेल कुछ राजस्व निरीक्षक एंव 8-10 पटवारी मिल कर ऐसी सी एल कोयला खदान का सर्वे करने गए थें, जैसे ही इस क्षेत्र के ग्रामीणों को पता चला फिर इन गांवों के आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा एकजुट होकर लालपुर उरवा पेलमा सक्ता जरहीडीह लोगों ने गांव से खदेड़ दिया इस कोयला खदान क्षेत्र में 14 गांव आंतें है यह कोयला खदान ई सी सी एल को 2010 में दी गई थी जिसका बिरोध ग्रामीणों द्वारा 2010 से ही किया जा रहा है आस पास के कोयला खदान प्रभावितों का कहना है कि हमको ऐसा विकास नहीं चाहिए ग्रामीणों द्वारा अपने अपने ग्राम सभा में कोयला खदान के बिरोध में प्रसताव पास करके जिला प्रशासन राज्य सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार को कई बार दें चुके हैं कुछ दिन पहले ही ई सी सी एल कोयला खनन का समझौता अदानी से 6008 रू 22 बरसों के लिए किया जिसके विरोध में 20 फरवरी 2023 से पेलमा गांव से तीन दिवसीय पदयात्रा कर बिरोध पत्र कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टीस हाई कोर्ट के चीफ जस्टीन हाई कोर्ट एंव राज्यपाल मुख्यमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया था जिस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे ग्रामीणों में वायापक आक्रोष बयाप्त है बता दे कि ऐसे ही मामला पिछले कुछ महीने पहले मुडगांव में भी सर्वे करने पहुंचे थे तहसीलदार की टीम जिसे आक्रोशित ग्रामीणों ने गांव से भगाया था परंतु वर्तमान में फिर वही पुनरावृति हो जाना समझ से परे है क्या यहां ग्रामीणों को समझाइश या उनकी मांगों को मानकर नहीं किया जा सकता या शासन-प्रशासन की दमनात्मक नीति का परिणाम यह दिखाई दे रहा है क्योंकि तमनार तहसीलदार अनुज पटेल का स्थानांतरण हो जाने के बाद कुछ ही दिनों में पुनःउसी तहसील पर स्थानांतरण होकर आना समझ से परे है या फिर इसी कार्य के लिए उन्हें पुनः तमनार तहसील में लाया गया है क्योंकि सूत्रों से पता चला है कि उक्त क्षेत्र में उनके रिश्तेदारों का परिवारिक रिश्तो का जमावड़ा भी है तमनार तहसील में ही उनके ससुराल का होना औऱ भी संदेह को बढ़ाता है कहीं यह तो नही की शासन के काम के साथ ही साथ लाभ पहुंचाने के लिए तो नही है

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