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ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बना तमनार, अब सियासी रणभूमि की आहट 15 वार्डों में बंटा तमनार—अध्यक्ष की कुर्सी पर किसका कब्जा? कौन बनेगा पार्षद, किसके सिर सजेगा ताज?

ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बना तमनार, अब सियासी रणभूमि की आहट

15 वार्डों में बंटा तमनार—अध्यक्ष की कुर्सी पर किसका कब्जा? कौन बनेगा पार्षद, किसके सिर सजेगा ताज?

तमनार।
ग्राम पंचायत से नगर पंचायत का सफर तय कर चुके तमनार में अब विकास के साथ-साथ राजनीतिक हलचल भी तेज होने लगी है। छत्तीसगढ़ राजपत्र में 10 जुलाई 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार तमनार नगर पंचायत को 15 वार्डों में विभाजित किया गया है। यानी अब तमनार की स्थानीय राजनीति का मैदान पहले से कहीं बड़ा और ज्यादा दिलचस्प होने वाला है।

किस वार्ड में कौन होगा चेहरा?

राजपत्र में तमनार के 15 वार्डों के नाम तय किए गए हैं—
सिदारपारा बासनपाली, स्कूलपारा बासनपाली, मंदिरपारा बासनपाली, इंदिरा नगर, राम मंदिर पारा, हाईस्कूल पारा, साहूपारा, गोहड़ीडीपा, नदी रोड एवं थाना पारा, मोसी मंदिर पारा, कबीर चौक पारा, पटनायक पारा, सिदारपारा, बाजार पारा और कुधरीपारा।

अब असली सवाल यह है कि इन वार्डों से कौन-कौन चुनावी मैदान में उतरता है? कौन जनता का भरोसा जीतता है और कौन सिर्फ राजनीतिक समीकरणों के भरोसे मैदान में उतरता है?
कौन हो सकता है अध्यक्ष का चेहरा

नगर पंचायत बनने के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल अध्यक्ष पद को लेकर है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने मजबूत चेहरे की तलाश में जुट चुके हैं। स्थानीय स्तर पर वर्षों से सक्रिय नेताओं, पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नए राजनीतिक चेहरों के बीच टिकट की दौड़ तेज होना तय माना जा रहा है।
लेकिन नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी केवल पार्टी के चुनाव चिह्न से नहीं मिलेगी—यहां वार्डों के समीकरण, व्यक्तिगत जनाधार, जातीय-सामाजिक संतुलन और स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
तमनार की आबादी का आंकड़ा भी बताएगा चुनावी गणित
राजपत्र में दिए गए 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार संबंधित तालिका में कुल आबादी 6,873 दर्शाई गई है। इसमें:
अनुसूचित जाति — 228
अनुसूचित जनजाति — 1,368
सामान्य वर्ग — 5,277
यह आंकड़ा 2011 की जनगणना की आबादी है, मतदाता संख्या नहीं। वास्तविक चुनावी रणनीति के लिए वार्डवार वर्तमान मतदाता सूची का आंकड़ा अधिक महत्वपूर्ण होगा।
भाजपा-कांग्रेस में हो सकती है सीधी टक्कर?
तमनार में मुकाबला अगर भाजपा बनाम कांग्रेस के बीच सीधा होता है तो दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—15 वार्डों में मजबूत और जीताऊ चेहरों का चयन।
भाजपा जहां सत्ता और संगठन की ताकत के सहारे बढ़त बनाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, जनसरोकारों और क्षेत्रीय पकड़ को हथियार बना सकती है। ऐसे में बागी उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी भी कई वार्डों में पूरा चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
राज्य के 2025 नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने कुल 173 स्थानीय निकायों में 126 पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस 30 निकायों तक सीमित रही थी। हालांकि तमनार का चुनाव स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगा और राज्यव्यापी परिणाम को सीधे यहां लागू नहीं किया जा सकता। �

अब तमनार पूछ रहा है—अध्यक्ष कौन? पार्षद कौन?
नगर पंचायत की नई संरचना के साथ तमनार में अब केवल सड़क, नाली, पानी और स्ट्रीट लाइट का सवाल नहीं होगा। राजनीतिक नेतृत्व की परीक्षा भी होगी।
कौन जनता के बीच लगातार रहा?
किसने विकास के मुद्दे उठाए?
किसके पास संगठन है?
किसके पास व्यक्तिगत जनाधार है?
और सबसे बड़ा सवाल—किस चेहरे पर जनता नगर पंचायत की कमान सौंपना चाहेगी?
15 वार्ड, दर्जनों संभावित दावेदार और अध्यक्ष की एक कुर्सी।
तमनार में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा अपनी सियासी पकड़ मजबूत करती है या कांग्रेस वापसी का रास्ता तलाशती है—और इन दोनों के बीच कौन सा नया चेहरा पूरी बाजी पलट देता है
**तमनार की राजनीति में अब पंचायत वाला दौर खत्म, नगर पंचायत की सियासी पारी शुरू।**

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