
सड़क पर दम तोड़ता गौवंश, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
तमनार-घरघोड़ा क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर लगातार गौवंश की मौत, घायल पशुओं के उपचार और मृत पशुओं के उठाव की व्यवस्था पर भी सवाल
तमनार। तमनार और घरघोड़ा क्षेत्र की सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर गौवंश के घायल होने और मौत का सिलसिला गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच सड़क पर बैठे या घूमते गौवंश के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक बेजुबान गौवंश तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आता रहेगा?
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही घटनाओं ने गौवंश की सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हादसे के बाद की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में घायल पशुओं के तत्काल उपचार तथा मृत गौवंश को सड़क से हटाने की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई देती।
हादसे के बाद सड़क पर पड़ा रहता है मृत गौवंश
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क हादसे में गौवंश की मौत के बाद कई बार मृत पशु को सड़क से हटाने में भी देरी होती है। इससे जहां यातायात प्रभावित होता है, वहीं दूसरे वाहनों से दोबारा हादसे की आशंका भी बनी रहती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और गौसेवा से जुड़े संगठनों की जिम्मेदारी आखिर कहां से शुरू होती है और कहां खत्म? गौवंश की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हादसे के बाद मौके पर व्यवस्था कितनी सक्रिय होती है, यह जमीनी घटनाएं सवालों के घेरे में ला रही हैं।
स्थानीय समिति बनी सहारा
तमनार में स्थानीय गौ सेवा समिति द्वारा हादसों में घायल और मृत गौवंश के लिए उपचार एवं अंतिम व्यवस्था का कार्य किए जाने की बात सामने आई है।
स्थानीय गौ सेवा समिति के गोपाल गुप्ता का कहना है कि सड़क हादसों में जब गाय घायल होती हैं या उनकी मौत हो जाती है, तो समिति की ओर से उनके उपचार और दफन की व्यवस्था की जाती है। उनका आरोप है शासन प्रशासन और गौसेवकों की ओर से समिति को अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता।
सवाल सिर्फ व्यवस्था का नहीं, जवाबदेही का भी
तमनार-घरघोड़ा क्षेत्र में औद्योगिक वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था की जरूरत है। गौवंश के लिए संवेदनशील मार्गों पर गति नियंत्रण, चेतावनी संकेत, उचित निगरानी और हादसे के बाद तत्काल रेस्क्यू व्यवस्था जैसे कदमों पर गंभीरता से काम किए जाने की जरूरत है।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सड़क हादसे में गौवंश की मौत या घायल होने की स्थिति में कौन-सा विभाग मौके पर पहुंचेगा, उपचार कौन कराएगा और मृत पशु को सड़क से हटाने की जिम्मेदारी किसकी होगी या फिर गौ माता सिर्फ राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए ही है
गौवंश को लेकर धार्मिक और सामाजिक भावनाएं व्यापक हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या गौसेवा केवल नारों और राजनीतिक विमर्श तक सीमित रहेगी, या सड़क पर घायल और मृत गौवंश की वास्तविक देखभाल के लिए भी स्थायी व्यवस्था बनेगी?
अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जवाबदेही तय करने और सड़क पर गौवंश की सुरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई की है। अब देखना ये है कि हवा हवाई वादों एवं दावों के बीच गौ वंश पिसती रहेगीं