
तमनार की सड़कें बनी खून की प्यासी – कब थमेगा मौत का सिलसिला?
तमनार क्षेत्र की सड़कें अब विकास की राह नहीं, मौत का रास्ता बन चुकी हैं। आए दिन होने वाले हादसों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। खून से लाल होती सड़कें इस बात की गवाही दे रही हैं कि जिम्मेदार अधिकारी और विभाग पूरी तरह से बेबस हो चुके हैं। सवाल उठता है – आखिर कब तक मासूमों की लाशों पर चुप्पी साधे बैठे रहेंगे जिम्मेदार?
हैवी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर न तो ट्रैफिक पुलिस का डर है और न ही प्रशासन का नियंत्रण। सड़क पर छोटे वाहन और आम लोग इन दौड़ते मौत के पहियों के सामने असहाय नजर आते हैं। यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं, बल्कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर है।
स्थानीय लोग तंज कसते हुए कहते हैं – जब अफसरों की कुर्सियां उद्योगों के रहमोकरम पर टिकी हों, तो भला कार्रवाई कैसे होगी? यही वजह है कि डंपर और ट्रक खुलेआम रफ्तार भरते हैं और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
अब जनता सवाल कर रही है –
क्या तमनार की सड़कें उद्योगों के मुनाफे के लिए हैं या जनता की सुरक्षा के लिए?
कब तक ट्रांसपोर्टरों की मनमानी चलती रहेगी
क्या प्रशासन केवल हादसों के बाद कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहेगा?
आखिर कब तक लोगों की लाशों पर विकास की गाड़ी दौड़ाई जाएगी?
गांव-गांव में आक्रोश बढ़ती जा रही है – अगर जल्द ही स्पीड कंट्रोल, ओवरलोडिंग पर रोक और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो लोग सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे।
तमनार क्षेत्रा की जनता का सीधा सवाल –
क्या जिम्मेदारों का ऑफिस शासन नहीं चला पाती क्या जिम्मेदार उद्योगों के काम के लिए पोस्टिंग किए जाते हैं जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से कब तक पल्ला झाड़ने रहेंगे क्या शासन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई करेगी या यूं ही मौन सहमति देती रहेगी