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डिस्ट्रिक रैकिंग में रायगढ नवमे नम्बर पर जिले में चार काँग्रेसी विधायक फिर भी

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छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग द्वारा जारी ’’छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. (सतत विकास लक्ष्य) डिस्ट्रिक्ट रैंकिंग’’ में रायगढ़ जिले का नौवें स्थान पर आना मंत्री उमेश पटेल विधायक प्रकाश नायक, लालजीत राठिया और चक्रधर सिदार की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह है। यह दुर्भाग्य ही माना जायेगा कि औद्योगिक जिला रायगढ़ विकास के मामले में नक्सल प्रभावित जिला कोण्डागांव के बराबर में आकर खड़ा हो गया है जिसने आयोग की सूची में रायगढ़ के बराबर साठ अंक हासिल किए है। सवाल यह उठता है कि सर्वाधिक डीएमएफ, खनिज रॉयल्टी और सीएसआर देने वाले जिलों में शामिल रायगढ़ जिले की ऐसी दुर्गति क्यों हुई ?
यह जान कर रायगढ़वासी शर्मशार है कि बस्तर का दंतेवाड़ा जिला भी विकास के मामले में रायगढ़ जिले से आगे आठवें स्थान पर है। ये सूची स्वयं भूपेश सरकार के योजना आयोग द्वारा जारी की गई है लिहाजा शक की कोई गुंजाइश नहीं है।

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वैसे भी पिछले चार साल में विधायको के निकम्मेपन के सबूत यहां की हवा में घुले जहर के रूप में जन – जन तक पहुंच रही है। धूल-धुरसित गड्ढों से अटीपड़ी यहां की सड़कें जिले के कांग्रेसी विधायकों की अकर्मण्यता की गवाही दे रही है।

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पड़ोसी वनांचल जिला जशपुर भी विकास की रैंकिग में रायगढ़ जिले से आगे है।आयोग के अनुसार धमतरी सहित राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, बेमेतरा, गरियाबंद, महासमुंद व रायपुर जिले सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के आधार पर फ्रंट रनर जिलों में शामिल हैं। जबकि बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, कांकेर, मुंगेली, सरगुजा जिला 63 अंक के साथ छठवें स्थान पर, बिलासपुर, कबीरधाम और कोरबा जिला 62 अंक के साथ सातवें, दंतेवाड़ा, जशपुर और सूरजपुर जिला 61 अंक के साथ आठवें, कोण्डागांव और रायगढ़ जिला 60 अंक के साथ नौवें, स्थान पर हैं। यहां खुद राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास की यह रैंकिंग उसके द्वारा छत्तीसगढ़ में चलाई जा रही विकास योजनाओं की प्रगति के आधार पर है। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार भी यह मानती है कि रायगढ़ जिला उसके द्वारा संचालित योजनाओं के मामले में फिसड्डी है।
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर जो 17 सतत विकास लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। जिनमें गरीबी खत्म करना, पर्यावरण की रक्षा, आर्थिक असमानता को कम करना और सभी के लिए शांति और न्याय सुनिश्चित करना, अच्छा स्वास्थ्य और अच्छा जीवन स्तर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक सामानता, साफ पानी और स्वच्छता, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ शहरी और सामुदायिक विकास आदि शामिल है । सरकारी योजनाएं इन मानकों के इरगिर्द ही घूमती है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी रैंकिग से यह स्पष्ट हुआ है कि रायगढ़ जिला इन सभी मामलों में पिछले पायदान पर खड़ा है। ऐसे में मंत्री उमेश पटेल, विधायक प्रकाश नायक, लालजीत राठिया और चक्रधर सिदार को इस पिछड़ेपन के कारणों पर सफाई देनी चाहिए।

इन जनप्रतिनिधियों को बताना चाहिए कि कथित दशमलव दो प्रतिशत बेरोजगारी दर वाले प्रदेश में रायगढ़ के रोजगार दफ्तर में सवा लाख से ज्यादा बेरोजगार क्यों पंजीकृत हैं ? स्थानीय उद्योग में उनके रोजगार के लिए इन्होंने क्या प्रयास किए ? या फिर भूपेश बघेल के दशमलव दो प्रतिशत बेरोजगारी दर के आंकड़े झूठे है ? जिले में भूपेश बघेल की फ्लैगशिप योजना, किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुपोषण अभियान, शहरी आजीविका मिशन, डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, हाट बाजार क्लीनिक योजना, महतारी जतन योजना, नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी, स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल, मुख्यमंत्री कन्या दान योजना, नोनी सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री सौर सुजला योजना, हाफ बिजली बिल योजना, रूरल इंडस्ट्रियल पार्क, वनधन केन्द्र, लघु वनोपज प्रसंस्करण, मुख्यमंत्री सुगम सड़क आदि योजनाओं के बुरे हालात क्यों है जिनके आधार पर राज्य योजना आयोग ने ’’छत्तीसगढ़ सतत विकास लक्ष्य डिस्ट्रिक्ट रैंकिंग में रायगढ़ जिले को फिसड्डी बताया है।

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