
जर्जर भवन में चल रहा कृषि विभाग, किसानों की हितैषी सरकार पर उठे सवाल


तमनार (रायगढ़)
एक ओर सरकार किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड में कृषि विभाग स्वयं एक जर्जर और बदहाल भवन में संचालित हो रहा है। हालत ऐसी है कि विभाग के कर्मचारी और किसान हर दिन खतरे के साए में काम करने को मजबूर हैं।
भवन की दीवारों में दरारें, जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर, टपकती छत और जंग खाए दरवाजे-खिड़कियां इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वर्षों से इसकी न तो मरम्मत हुई और न ही रंग-रोगन। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब छत से पानी टपकता है और जरूरी दस्तावेज भीगने का खतरा बना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार किसानों के हित में करोड़ों की योजनाएं चला रही है, तब कृषि विभाग को ही एक सुरक्षित और व्यवस्थित भवन उपलब्ध क्यों नहीं कराया जा सका? किसानों को बीज, खाद, तकनीकी सलाह और योजनाओं की जानकारी देने वाला विभाग खुद बदहाली का शिकार है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं लेकर कार्यालय पहुंचते हैं तो अव्यवस्था और असुरक्षा का माहौल साफ नजर आता है। इससे शासन-प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।
विडंबना यह भी है कि जर्जर भवन की मरम्मत और रंग-रोगन तक वर्षों से नहीं हो पाया है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते भवन की स्थिति नहीं सुधारी गई तो कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करते हैं, या फिर किसानों के हितों की दुहाई देने वाली सरकार तमनार के कृषि विभाग को एक सुरक्षित और सम्मानजनक भवन उपलब्ध कराकर अपनी प्राथमिकता साबित करेगी।